रविवार, 7 मार्च 2010

कविता



पंजाबी कविता


विशाल

आज तुम्हें मुखातिब होते समय
मन में बड़ी अजीब सी बातें आ रही हैं
वैसे मैंने इस तरह
पहले कभी भी महसूस नहीं किया था
एक लम्बे अरसे से हम मिलते रहे हैं
एक-दूसरे को सुनते-सुनाते रहे हैं
भागीदार एक दूसरे के दुख के।
मेरे बारे में तुमने कई बार
अपने विचार बदले, बनाए
मेरे चेहरे को
कई तरह के फ्रेमों में बांधा
दिल से नहीं लगाया कई बातों को तुमने
मैं भी भूल गया बहुत कुछ
राह-बेराह मिल गए तो ठीक
न मिले तो भी ठीक
'रावी' सी चल रही थी ज़िन्दगी
जहाँ आदमी मिलता, बरतता है
ऊँच-नीच तो हो ही जाती है
वह भी अच्छा-बुरा सोचती थी मेरे बारे में
लड़ भी पड़ती थी
कई बार तो उसकी बिलकुल भी समझ नहीं पड़ती थी
जिस बात से मैं उसे अच्छा नहीं लगता था
उसी बात पर ही वह पसंद करती थी मुझे।
मन बड़ा अजीब सा हो रहा है आज
कि आख़िर किसलिए
मैंने अपने लिए सब कुछ नियुक्त किया
जिसके लिए मैं कभी भी सहमत नहीं होता था
सारे संस्कार-शिष्टाचार
क्यों बांध लिए अपने पैरों से
मेरा सफ़र तो और था
एक से दूसरा देश
देशों की हदें- सरहदें मेरा प्रवास नहीं था
अर्थों की कब्र पर बैठा
शब्द जन्मता रहा
मेरी चुप का, मेरे शब्दों का
मेरी किसी भी सतर का
हर बार हो जाता रहा गलत अनुवाद
मेरा अपना अस्तित्व कहीं भी सुरक्षित नहीं था
न मुहब्बत में, न नफ़रत में
न जुड़ने में, न टूटने में
तुम आते रहे
मुझे थोड़ा-सा खुरच कर
मेरी ही दहलीज़ों पर फेंक जाते रहे
उस वक्त मेरे अन्दर का शरणार्थी
रिश्तों के अन्दर-बाहर खतरे देखकर
अपने ही पैरों में शरण मांगता था
कोई कितना भर लड़े अपने खिलाफ़
इस लड़ाई में
मैंने बड़े वार खाये
उधर से भी मैं मरता
इधर से भी मैं हारता
थोड़ा कहीं गिरा, थोड़ा कहीं
मेरे में से 'मैं' रिसता रहा
आज तुम्हारे साथ बात करते हुए
मन में बड़ी अजीब सी बातें आ रही हैं
पता नहीं क्यों सोच रहा हूँ ऐसा
कि मैं तो पहले ही
तुम्हारे अहसानों के तले दबा पड़ा हूँ
और यदि तुम कुछ कर सकते हो मेरे लिए
तो इतना ज़रूर करना
मेरी सोच, मेरी किताबें, मेरी कविताएँ... और राख
पोटली में बांध कर जल में प्रवाहित न करना
आकाश की ओर बिखेर देना
मेरा पहला संस्करण
यहीं से तो इसी तरह शुरू होगा।


(हिंदी रूपांतर : सुभाष नीरव)0
पंजाबी के बहु चर्चित कवि।

कविता की अनेक पुस्तकें प्रकाशित।

पिछ्ले कई वर्षों से इटली मे।
सम्पर्क :
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46020-PEGOGNAGA(MN)
ITALY
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1 टिप्पणी:

Kamlesh Kumar Diwan ने कहा…

kavita me achche bhabhavykti hai.