
सुधा ओम ढींगरा की दस कवितायें
१) रात भर
रात भर
यादों को
सीने में
उतारती रही,
चाँद- तारों
को भी
चुप-चाप
निहारती रही.
शांत
वातावरण
में न
हलचल हो कहीं,
तेरा नाम
धीरे से
फुसफुसा कर
पुकारती रही.
तेरी नजरें
जब भी
मिलीं
मेरी नज़रों से,
उन क्षणों को
समेट
पलकों का सहारा
देती रही.
उदास
वीरान
उजड़े
नीड़ को,
अश्रुओं
कुछ आहों
चंद सिसकियों से
संवारती रही.
जीवन की
राहों में
छूट गए
बिछुड़ गए जो ,
मुड़-मुड़ के
उन्हें देखती
लौट आने को
इंतज़ारती रही.
२)रिश्ते
तुमने कितनी ज़ल्दी
इस अनाम एहसास को
नाम दे दिया,
रिश्ते में बांध दिया.
मैंने तो सिर्फ़ इतना कहा था
कि तुम मेरे दिल के क़रीब हो
क्या दिल के क़रीब सिर्फ़ रिश्ते होते हैं?
वो एहसास वे जज़्बात
जो अँकुरित हुए ही थे,
जिन्हें पलना था,
बढ़ना था,
पल्लवित और
परिमार्जित होना था,
परवान चढ़ना था
अपने शैशवकाल में ही
रिश्तों की सूली पर टँग गए.
भावनाएँ-संवेग
खुले रहकर भी मर्यादित रह सकते हैं
फिर बंधना-बाँधना क्यों?
शायद तुमने सामाजिक ज़रूरत समझी होगी,
मैं ऐसा समाज निर्मित करूँगी
जहाँ औरत सिर्फ़ माँ, बेटी, बहन, पत्नी या
इस अनाम एहसास को
नाम दे दिया,
रिश्ते में बांध दिया.
मैंने तो सिर्फ़ इतना कहा था
कि तुम मेरे दिल के क़रीब हो
क्या दिल के क़रीब सिर्फ़ रिश्ते होते हैं?
वो एहसास वे जज़्बात
जो अँकुरित हुए ही थे,
जिन्हें पलना था,
बढ़ना था,
पल्लवित और
परिमार्जित होना था,
परवान चढ़ना था
अपने शैशवकाल में ही
रिश्तों की सूली पर टँग गए.
भावनाएँ-संवेग
खुले रहकर भी मर्यादित रह सकते हैं
फिर बंधना-बाँधना क्यों?
शायद तुमने सामाजिक ज़रूरत समझी होगी,
मैं ऐसा समाज निर्मित करूँगी
जहाँ औरत सिर्फ़ माँ, बेटी, बहन, पत्नी या
प्रेमिका ही नहीं
एक इन्सान,
सिर्फ़ इन्सान हो,
उसे इसी तरह
जाना, पहचाना और परखा जाए ।
एक इन्सान,
सिर्फ़ इन्सान हो,
उसे इसी तरह
जाना, पहचाना और परखा जाए ।
३)क्या पाया.......
खुशियाँ ढूँढने चले
ग़म राह में गड़े थे.
ग़मों को चुन कर हटाया
दर्द साथ ही खड़े थे.
दर्द से रिश्ता जोड़ा
आँसू झर-झर झड़े थे.
आँसुओं को जब समेटा
दिन जीवन के कम पड़े थे.
४)अलगाव
साथ-साथ इकठ्ठे चले
दुनिया जीतने हम.
सीढ़ी दर सीढ़ी
चढ़ते गए--
पीछे न मुड़े हम.
बुलंदियाँ छूने
ऊँचे उठे--
बेखबर उड़ते ही रहे हम.
प्रेम, समझौता भूल
अस्तित्व-व्यक्तित्व से--
टकराते रहे हम.
स्वाभिमान मेरा
अहम् तुम्हारा--
अकड़ी गर्दनों से अड़े रहे हम.
अकाश से तुम
धरती सी मैं--
क्षितिज तलाशते रहे हम.
भोर की लालिमा
साँझ की कालिमा--
डगमग सा जीते रहे हम.
बेतुकी बातों का मुद्दा
बना निस्तेज से प्राणी--
भावनाओं को चोट पहुँचाते रहे हम.
असमान छूते
नीड़ तलाशते--
चोंच से चोंच लड़ाते रहे हम.
वक्त ने झटका दिया
हाथ छूटा, साथ टूटा--
दिशाओं अलग में चल दिए हम.
मैं कहाँ और
तुम कहाँ चल दिए
कहाँ से क्या हो गये हम.
दुनिया तो दूर, स्वयं को भी
जीतने के काबिल न रहे हम.
५)नज़रों से ओझल
मंदिरों के घंटे
मस्जिदों की अज़ाने
शून्य चीरते
हवाओं संग गूँजते
बुलाएँ ऐसे जैसे शाम को सहर.
सुखद क्षणों में भूलें
दुखद पलों में पुकारें
गम की लहरों में
खोजें उसका ठौर
ढूँढें ऐसे जैसे रात को पहर.
हर गाँव
हर बस्ती में
है उसका बसर
फिर क्यूँ भटके इधर-उधर
खोजें ऐसे जैसे सागर को लहर.
झलक न पाई उसकी
पढ़ डाले वेद-पुराण
नज़रों से ओझल रहा
देखा हर द्वार
कम रही
शायद आराधना
पाया न ऐसे जैसे आँसूं को नज़र.
६ )खिलवाड़
दिन की आड़ में
किरणों का सहारा ले
सूर्य ने सारी खुदाई
झुलसा दी.
रात ने धीरे से
चाँद का मरहम लगा
तारों के फहे रख
चाँदनी की पट्टी कर
सुला दी.
७ )वादा किया होगा
धीरे -धीरे
जो कत्ल हुआ होगा
दर्द जाने उसने कितना पिया होगा .
संवेदनशील क्षणों में
स्वार्थ के वजूद को देख
चैन अपना
औरों के नाम किया होगा.
स्वागत में पतझड़ के
झड़ गए पत्ते
उड़ गए आँधी संग
दम तो उसका,
जो फिर भी खड़ा रहा होगा.
समय के थपेड़े
जीवन की बेरहम तरंगें
जान पाएँगी कहाँ
तोड़ा जो घरौंदा होगा.
दहलीज़ ही से जो
लौट यात्रा को गए
यकीनन उन्हें
घर खाली सा लगा होगा.
चाँद से तो नम न होगी
वादों की ज़मीं
आँचल जब किरणों से
भरने का वादा किया होगा.
८ )मजबूरी
न कहने की मजबूरी
दिल पर भारी है.
कुछ कहने की मजबूरी
बुद्घि पर भारी है.
रिश्तों के टूटने की मजबूरी
आत्मा पर भारी है.
रिश्तों को निभाने की मजबूरी
विवेक पर भारी है.
ऐसी मजबूरी की मजबूरी
क्यों निभाना ज़रूरी है?
दिल पर भारी है.
कुछ कहने की मजबूरी
बुद्घि पर भारी है.
रिश्तों के टूटने की मजबूरी
आत्मा पर भारी है.
रिश्तों को निभाने की मजबूरी
विवेक पर भारी है.
ऐसी मजबूरी की मजबूरी
क्यों निभाना ज़रूरी है?
९)बचा लो इन्हें
तेज़ हवाओं से
डर कर
कहीं बुझ न जायें
दीए,
बचा लो उन्हें
करके साया
दुआओं का .
दिल के
ज़ख्म
दिल में ही
रहने दो
न जान ले
इन्हें कोई
तेरी अदाओं से.
छुपा लो
ख़ुद को
ख़ुद में
या पर्दे में
पता फिर भी
जान ही लेंगे
इन फिज़ाओं से.
रूह छोड़ने
लगती है जब
घरौंदा अपना
नहीं पलट कर आती
वह सदाओं से.
(यह कविता ईराक युद्ध में शहीद हुए नौजवान सिपाहियों को समर्पित हैं. इसे नार्थ-कैरोलाइना (अमेरिका) के सैनिक संस्थान समारोह में पढ़ा गया था.)
१०) माँ की फरियाद
सूरज से कहो
रौशनी न दे
अंधेरों में रह लूंगी.
चाँद से कहो
चाँदनी न दे
बिन चाँदनी जी लूंगी.
तारों से कहो
अपनी चमक न दें
रास्तों में भटक लूंगी.
ऋतुओं से कहो
रंग बदलना छोड़ दें
बेरंगी ही रह लूंगी.
सब दुःख सह लूंगी
पर बेटा मेरा लौटा दो मुझे
वह सिर्फ़ देश प्रेमी और
सिपाही ही नहीं, इन्सान भी है.
२० वर्ष भी पूरे नहीं
किए उसने,
लड़ने का ही नहीं
जीने का भी हक़ है उसे.
*****
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सुधा ओम ढींगरा
सुधा ओम ढींगरा का जन्म--जालंधर , पंजाब (भारत) में हुआ.
सुधा ओम ढींगरा का जन्म--जालंधर , पंजाब (भारत) में हुआ.
शिक्षा- बी.ए.आनर्ज़, एम.ए. ,पीएच.डी ( हिंदी ) , पत्रकारिता में डिप्लोमा.
लेखन विधायें--कविता, कहानी , उपन्यास , इंटरव्यू , लेख एवं रिपोतार्ज.
प्रकाशित साहित्य--मेरा दावा है (काव्य संग्रह-अमेरिका के कवियों का संपादन ) ,तलाश पहचान की (काव्य संग्रह ) ,परिक्रमा (पंजाबी से अनुवादित हिन्दी उपन्यास), वसूली (कथा- संग्रह हिन्दी एवं पंजाबी ), सफर यादों का (काव्य संग्रह हिन्दी एवं पंजाबी ), माँ ने कहा था (काव्य सी .डी ). पैरां दे पड़ाह , (पंजाबी में काव्य संग्रह ), संदली बूआ (पंजाबी में संस्मरण ). १२ प्रवासी संग्रहों में कविताएँ, कहानियाँ प्रकाशित.
अन्य गतिविधियाँ एवं विशेष--विभौम एंटर प्राईसिस की अध्यक्ष , हिन्दी विकास मंडल (नार्थ कैरोलाइना) के न्यास मंडल में हैं. अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति (अमेरिका) के कवि सम्मेलनों की राष्ट्रीय संयोजक हैं. 'प्रथम' शिक्षण संस्थान की कार्यकारिणी सदस्या एवं उत्पीड़ित नारियों की सहायक संस्था 'विभूति' की सलाहकार हैं. हिन्दी चेतना (उत्तरी अमेरिका की त्रैमासिक पत्रिका) की सह- संपादक हैं. पत्रकार हैं -अमेरिका से भारत के बहुत से पत्र -पत्रिकाओं एवं वेब पत्रिकाओं के लिए लिखतीं हैं. अमेरिका में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए अनगिनत कार्य किये हैं. हिन्दी पाठशालाएं खोलने से ले कर यूनिवर्सिटी में हिन्दी पढ़ाई. इंडिया आर्ट्स ग्रुप की स्थापना कर हिन्दी के बहुत से नाटकों का मंचन कर लोगों को हिन्दी भाषा के प्रति प्रोत्साहित कर अमेरिका में हिन्दी भाषा की गरिमा को बढ़ाया है. अनगिनत कवि सम्मेलनों का सफल संयोजन एवं संचालन किया है. रेडियो सबरंग ( डेनमार्क ) की संयोजक. टी.वी , रेडियो एवं रंगमंच की प्रतिष्ठित कलाकार. पुरस्कार- सम्मान-- १) अमेरिका में हिन्दी के प्रचार -प्रसार एवं सामाजिक कार्यों के लिए वाशिंगटन डी.सी में तत्कालीन राजदूत श्री नरेश चंदर द्वारा सम्मानित. २) चतुर्थ प्रवासी हिन्दी उत्सव २००६ में ''अक्षरम प्रवासी मीडिया सम्मान.'' ३) हैरिटेज सोसाइटी नार्थ कैरोलाईना (अमेरिका ) द्वारा ''सर्वोतम कवियत्री २००६'' से सम्मानित , ४) ट्राईएंगल इंडियन कम्युनिटी, नार्थ - कैरोलाईना (अमेरिका ) द्वारा ''२००३ नागरिक अभिनन्दन ''. हिन्दी विकास मंडल , नार्थ -कैरोलाईना( अमेरिका ), हिंदू- सोसईटी , नार्थ कैरोलाईना( अमेरिका ), अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति (अमेरिका) द्वारा हिन्दी के प्रचार -प्रसार एवं सामाजिक कार्यों के लिए कई बार सम्मानित.संपर्क--101 Guymon Ct., Morrisville, NC-27560. U.S.A.E-mail-sudhaom9@gmail .comPhone-(919) 678-9056
Hindi blog : http://www.vibhom.com/blogs/Web site : http://www.vibhom.com
लेखन विधायें--कविता, कहानी , उपन्यास , इंटरव्यू , लेख एवं रिपोतार्ज.प्रकाशित साहित्य--मेरा दावा है (काव्य संग्रह-अमेरिका के कवियों का संपादन ) ,तलाश पहचान की (काव्य संग्रह ) ,परिक्रमा (पंजाबी से अनुवादित हिन्दी उपन्यास), वसूली (कथा- संग्रह हिन्दी एवं पंजाबी ), सफर यादों का (काव्य संग्रह हिन्दी एवं पंजाबी ), माँ ने कहा था (काव्य सी .डी ). पैरां दे पड़ाह , (पंजाबी में काव्य संग्रह ), संदली बूआ (पंजाबी में संस्मरण ). १२ प्रवासी संग्रहों में कविताएँ, कहानियाँ प्रकाशित.
अन्य गतिविधियाँ एवं विशेष--विभौम एंटर प्राईसिस की अध्यक्ष , हिन्दी विकास मंडल (नार्थ कैरोलाइना) के न्यास मंडल में हैं. अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति (अमेरिका) के कवि सम्मेलनों की राष्ट्रीय संयोजक हैं. 'प्रथम' शिक्षण संस्थान की कार्यकारिणी सदस्या एवं उत्पीड़ित नारियों की सहायक संस्था 'विभूति' की सलाहकार हैं. हिन्दी चेतना (उत्तरी अमेरिका की त्रैमासिक पत्रिका) की सह- संपादक हैं. पत्रकार हैं -अमेरिका से भारत के बहुत से पत्र -पत्रिकाओं एवं वेब पत्रिकाओं के लिए लिखतीं हैं. अमेरिका में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए अनगिनत कार्य किये हैं. हिन्दी पाठशालाएं खोलने से ले कर यूनिवर्सिटी में हिन्दी पढ़ाई. इंडिया आर्ट्स ग्रुप की स्थापना कर हिन्दी के बहुत से नाटकों का मंचन कर लोगों को हिन्दी भाषा के प्रति प्रोत्साहित कर अमेरिका में हिन्दी भाषा की गरिमा को बढ़ाया है. अनगिनत कवि सम्मेलनों का सफल संयोजन एवं संचालन किया है. रेडियो सबरंग ( डेनमार्क ) की संयोजक. टी.वी , रेडियो एवं रंगमंच की प्रतिष्ठित कलाकार. पुरस्कार- सम्मान-- १) अमेरिका में हिन्दी के प्रचार -प्रसार एवं सामाजिक कार्यों के लिए वाशिंगटन डी.सी में तत्कालीन राजदूत श्री नरेश चंदर द्वारा सम्मानित. २) चतुर्थ प्रवासी हिन्दी उत्सव २००६ में ''अक्षरम प्रवासी मीडिया सम्मान.'' ३) हैरिटेज सोसाइटी नार्थ कैरोलाईना (अमेरिका ) द्वारा ''सर्वोतम कवियत्री २००६'' से सम्मानित , ४) ट्राईएंगल इंडियन कम्युनिटी, नार्थ - कैरोलाईना (अमेरिका ) द्वारा ''२००३ नागरिक अभिनन्दन ''. हिन्दी विकास मंडल , नार्थ -कैरोलाईना( अमेरिका ), हिंदू- सोसईटी , नार्थ कैरोलाईना( अमेरिका ), अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति (अमेरिका) द्वारा हिन्दी के प्रचार -प्रसार एवं सामाजिक कार्यों के लिए कई बार सम्मानित.संपर्क--101 Guymon Ct., Morrisville, NC-27560. U.S.A.E-mail-sudhaom9@gmail .comPhone-(919) 678-9056
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