रविवार, 29 नवंबर 2009

रपट



राधेश्याम तिवारी की कविताओं में बेहद सादगी है.

कुंवर नारायण

पटना से आरती सिंह

राधेश्याम तिवारी की कविताओं में बेहद सादगीपूर्ण संघर्ष की चेतना है। इनकी कविताओं से भाषा में मैत्रीपूर्ण व्यवहार का सुखद अहसास होता है। कविता में यह सादगी बहुत मुश्किल से मिलती है। यह टिप्पणी प्रख्यात हिंदी कवि कुँवर नारायण की है। गत दिनों पटना में राधेश्याम तिवारी की नई कविता पुस्तक, ‘इतिहास में चिडि़या’ का विमोचन करते हुए उन्होंने ये बातें कहीं थीं। कुंवर नारायण ने कहा कि भाषा की यह सादगी राधेश्याम तिवारी की कविताओं की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि भाषा को अपनी बात कहने देना चाहिए। उस पर अनावश्यक दबाव देने से कविता बिगड़ जाती है।

इस अवसर पर नई धारा के संपादक एवं कवि-आलोचक डॉ. शिवनारायण ने कहा कि राधेश्याम तिवारी हमारी पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवि हैं। इनकी कविताएं अपने गहरे अर्थबोध के कारण हमें दूर तक ले जाती हैं . उन्होंने कहा कि संप्रेषणीयता के अलावा राधेश्याम तिवारी की कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता उनकी जनपक्षधरता है, जो हमें सम्मोहित करती है। इस अवसर पर अन्य वक्ताओं में परेश सिनहा, अशोक कुमार सिन्हा, ममता मेहरोत्रा आदि थे।

इस अवसर पर तिवारी ने अनेक कविताएं सुनाईं, जिसे श्रोताओं ने मन से सराहा .
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